​खूनी शादी- 4: पुलिसवाली के चक्कर में बीवी-बच्चों को मार डाला; दोस्त की हत्या कर खुद को मृत दिखाया, 4 साल बाद खुला राज


अगस्त 2021: करीब चार साल पुराने एक मामले की DNA रिपोर्ट सामने आई, जिसने पुलिस के होश उड़ा दिए। साल 2018 में जिस 'सिरकटी लाश' का परिवार ने अपना बेटा समझकर अंतिम संस्कार किया था, वह असल में राकेश की नहीं थी। वह शख्स जिंदा था और एक खौफनाक साजिश रचकर फरार हो गया था।

​खूनी शादी के चौथे एपिसोड में आज कहानी अलीगढ़ के राकेश और रत्नेश की। एक पुलिसवाली के प्यार में अंधे पिता ने अपने ही दो मासूम बच्चों और पत्नी का गला घोंट दिया, फिर अपनी मौत का नाटक रचा। 4 साल बाद एक छोटी सी गलती और एक फोन कॉल ने उसे सलाखों के पीछे पहुँचा दिया।

​2012: जब रखी गई नफरत की नींव

​अलीगढ़ का नौगवां गांव। दोपहर का वक्त था और यूपी पुलिस से रिटायर्ड बनवारीलाल के घर में हलचल तेज थी। बड़ा बेटा राकेश आंगन में बैठा था, तभी पिता ने उसे आवाज दी— "राकेश अंदर आओ, सब लोग तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं।"

​कमरे में मां, पिता, छोटा भाई राजीव और कुछ रिश्तेदार बैठे थे। माहौल में एक अजीब सी गंभीरता थी। बनवारीलाल ने सीधे मुद्दे की बात की— "तुम्हारी शादी तय कर दी है। लड़की एटा की है, घरेलू और संस्कारी है।"

​पूरा परिवार खुश था, लेकिन राकेश के चेहरे पर सन्नाटा था। उसकी चुप्पी देख मां ने पूछा— "कोई परेशानी है क्या?" राकेश ने कोई जवाब नहीं दिया और नजरें झुकाकर कमरे से बाहर चला गया।

​"मैं रूबी से प्यार करता हूँ"

​राकेश के पीछे उसका भाई राजीव भी बाहर आया। कंधे पर हाथ रखकर पूछा— "भाई, क्या बात है?" राकेश ने लंबी सांस ली और टूटते हुए बोला— "तू तो जानता है, मैं रूबी को चाहता हूँ। शादी करूँगा तो उसी से।"

​राजीव ने अंदर जाकर पिता को यह बात बता दी। बनवारीलाल का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा। उस रात घर में सन्नाटा पसरा रहा। अगले दिन दोपहर के खाने पर फिर वही चर्चा छिड़ी। बनवारीलाल ने थाली पटकते हुए कहा— "उस लड़की में ऐसा क्या है? क्या वो लड़की दहेज दे पाएगी? खानदान देखा जाता है, सिर्फ चेहरा नहीं।"

​राकेश ने धीमी आवाज में दलील दी— "वो पढ़ी-लिखी है, सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही है।" इस पर पिता ने तंज कसा— "हमारे पास पैसों की कमी नहीं है। घर चलाने के लिए नौकरीपेशा नहीं, घरेलू लड़की चाहिए।"

​दबाव में हुई शादी और अधूरा मन

​परिवार के दबाव और पिता की जिद के आगे राकेश टूट गया। आखिरकार उसकी शादी एटा की रहने वाली रत्नेश से धूमधाम से कर दी गई। रत्नेश ससुराल तो आई, लेकिन उसे एक ऐसा पति मिला जो शारीरिक रूप से उसके साथ था, पर मानसिक रूप से कहीं और। राकेश का मन अब भी अपनी प्रेमिका रूबी में अटका था, जो आगे चलकर पुलिस में भर्ती हो गई। यहीं से शुरू हुआ धोखे, कत्ल और साजिश का वो खेल जिसने दो परिवारों को तबाह कर दिया।

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